लहसुन की फसल पर फंगस का हमला

खराहल (कुल्लू)। कुल्लू जिले में लहसुन की फसल पर फंगस का कहर बरपा है। शुरुआती दौर में ही फंगस लगने से लहसुन के पौधे को क्षति पहुंच रही है। घाटी में कई जगहों पर इस रोग का प्रकोप देखने को मिल रहा है। रोग के कहर से फिलहाल 10 फीसदी फसल बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है। अगर समय रहते बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो रोग और अधिक फैलकर खेतों को तबाह कर सकता है।
फंगस तने से होकर जड़ों तक पहुंच रहा है। ऐसे में पूरा पौधा पीला पड़कर सूखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सूखे के कारण पौधों पर रोग का कहर बरपा है। हालांकि, इस बीमारी का कहर अभी आंशिक रूप से देखने का मिल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते किसानों की ओर से सेल्यूल के मुताबिक लहसुन के पौधों पर दवाई का छिड़काव कर रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। जिले में खराहल, लगघाटी, ऊझीघाटी, सैंज और बंजार में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है, मगर इस वर्ष शुुरुआती दौर में ही फंगस ने लहसुन की फसल को जकड़ना शुरू कर दिया है। किसान बीमारी के प्रति काफी चिंतित हैं। जिले में करीब 950 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती की जा रही है। घाटी के बराधा, न्यूली, गाहर, थरमाण, सेऊबाग, छाडगडी गांवों में मंगलवार को कृषि विभाग के फील्ड स्टाफ ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों को छिड़काव के लिए दवाइयां की जानकारी दी। घाटी के किसानों यशपाल राणा, नितिन, रोशन, अनिश, मोहर सिंह और रामनाथ ने बताया कि उनके खेतों में लहसुन पीला होकर सूखने लगा है। उन्हें काफी नुकसान हो रहा है।
कृषि विभाग नग्गर ब्लॉक के प्रसार अधिकारी डा. अनिल कुमार ने बताया कि फंगस के चलते ये समस्या पेश आई है। सूखे के कारण भी लहसुन पीला हो रहा है। किसान डायथीन 45, 250 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। वे 15 दिन के बाद कैं पेनियन नामक दवाई 250 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा 15 दिन के अंतराल के बाद स्कोर नामक दवाई 30 एमएल प्रति 100 लीटर में पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।

Related posts